मैं हूँ... यह अच्छी बात है, परन्तु मैं ही हूँ यह उतनी ही बुरी बात है। कई बार आप से ऐसे लोग टकराए होंगे जो किसी कि सुनना तक नहीं चाहते। ऐसे लोगों के भीतर अहम भाव इतना अधिक होता है कि अपनी जिंदगी तक वो दाव पर लगा देते हैं। आपने देखा होगा, दोस्तों के बीच कई बार छोटी-छोटी बात पर लड़ाइयां हो जाती हैं। जिसका कोई ठोस कारण नहीं होता। अहम का टकराव दोस्त तो क्या माँ-बाप, भाई-बहन, पति-पत्नी जैसे महत्वपूर्ण और मजबूत रिश्तों को भी चकना-चूर कर देता है। Read more »