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दुश्मन से भले दोस्त...

क्या आपको याद है आपकी अब तक किस-किस से लड़ाई हुई है? अगर आपको याद हो तो यह सोचिए किस बात पर, कहाँ और किस दिन आपकी जुबानी जंग हुई थी। सोच में पड़ गए न, कितना फालतू सवाल है, भला लड़ाई भी कोई शादी या जन्मदिन है जिसे याद रखा जाए, हमें कौन सा उसके लिए पुरस्कार या उपहार मिलने वाला है? Read more »

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क्या पैसा मेहनत से कमाया जाता है?

 कौन कहता है कि पैसा मेहनत से कमाया जाता है। जो इस बात को कहता है वह पैसा नहीं कमाता बल्कि अपनी मेहनत की मज़दूरी लेता है। एक ऐसा मज़दूर जो की बचपन से बुढ़ापे तक केवल मेहनत करता है, फिर भी वह गरीब ही रहता है, अगर मेहनत से पैसा कमाया जाता तो आज हर मज़दूर को अमीर होता? Read more »

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दूसरों के व्यक्तित्व को भी स्वीकारें

मैं हूँ... यह अच्छी बात है, परन्तु मैं ही हूँ यह उतनी ही बुरी बात है। कई बार आप से ऐसे लोग टकराए होंगे जो किसी कि सुनना तक नहीं चाहते। ऐसे लोगों के भीतर अहम भाव इतना अधिक होता है कि अपनी जिंदगी तक वो दाव पर लगा देते हैं। आपने देखा होगा, दोस्तों के बीच कई बार छोटी-छोटी बात पर लड़ाइयां हो जाती हैं। जिसका कोई ठोस कारण नहीं होता। अहम का टकराव दोस्त तो क्या माँ-बाप, भाई-बहन, पति-पत्नी जैसे महत्वपूर्ण और मजबूत रिश्तों को भी चकना-चूर कर देता है। Read more »

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ग्रुप डिसकशन का अर्थ लड़ना नहीं होता

आज प्रतियोगिता का स्तर बहुत ऊँचा हो चुका है। हर नवयुवक, युवती इस बात को जानता या जानती है। परीक्षा देने से जिस तरह कोई ज्ञानी नहीं बन जाता ठीक उसी तरह ग्रुपडिस्कशन का अर्थ लड़ना या ऊँची आवाज में चीखना चिल्लाना नहीं होता। आज जैसे-जैसे प्रतियोगिताओं का स्तर बढ़ता जा रहा है अधिक से अधिक विभागों में लिखित परीक्षा के साथ-साथ अब साक्षात्कार और ग्रुप डिस्कशन के दौर चलाए जाने लगे हैं। Read more »

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