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कुरूप दिखना भी हिंसा है

स्वयं की शक्ल और सूरत पर सबको गुमान होता है और होना भी चाहिए, भाई ईश्वर की बनाई इस अनमोल सूरत पर गर्व तो होना ही चाहिए परन्तु कई लोग ऐसे भी होते हैं जो स्वयं की सूरत और शक्ल से बहुत परेशान और दुखी रहते हैं। उनका मानना है कि जो सूरत उन्हें मिली है उसमें कोई भी परिवर्तन नहीं हो सकता। Read more »

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मंच या मीटिंग में डरें नहीं

 अच्छा वक्ता होना कौन नहीं चाहता? कहीं किसी मंच पर जब हम किसी व्यक्ति को बोलते हुए सुनते और देखते हैं तो हम उसकी नकल करने लगते हैं। जब हम पहली बार किसी फिल्मी संवाद की नकल करते हैं तो भाषा के साथ-साथ चेहरे, हाथ-पैर, आंखें आदि सब का उपर्युक्त संयोजन करते हैं, ताकि हम ठीक उसी तरह की स्थिति को प्रस्तुत कर सकें, क्या केवल उन्हीं शब्दों और वाक्यों को दोहराने से ही काम नहीं चल सकता है? नहीं, भाषा के साथ-साथ भाव का होना भी जरूरी है।

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मल्टी लेवल मार्केटिंग के आधार भूत गुण

मल्टी लेवल मार्केटिंग में अधिक से अधिक लोगों को सदस्य बनाने के लिए कुछ ज़रूरी बातें हैं। जो आपको इस क्षेत्र में आसानी से सफल बना सकती है। मल्टी लेवल मार्केटिंग का नाम सुनकर हम यह सोचने लगते हैं कि आख़िर कोई क्यों हमारी बात मानेगा? या क्या पता सुनने वाला हमारे बारे में क्या सोचे? इस तरह की सोच रखने वाले लोग किसी भी काम को ढंग से नहीं कर सकते, क्योंकि जब आप बोलने में ही शर्माते हैं, तो आप कुछ भी नहीं कर सकते, हम आपको ये बता दें की बोलने का मतलब बक-बक करना नहीं होता। Read more »

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एम. एल. एम को सफल कैसे बनाएँ?

एम. एल. एम क्षेत्र में सफलता पाने के लिए कुछ ज़रूरी एहतियात।
सबसे पहले आपको यह तय करना है कि आप इससे जुड़कर क्या पाएँगें? क्या आप इस काम को उसी ऊर्जा के साथ कर पाएँगे, जितनी इसके लिए जरूरी होती है, आप आधे-अधूरे मन से इस काम की शुरूआत नहीं करें, हाँ यह हम ज़रूर कहना चाहेंगे की दुनिया में कुछ भी नामुमकिन नहीं होता, जरूरत होती है बस लगन और ईमानदार से कि गई कोशिश की, दुश्यंत कुमार की यह गज़ल इस वाक्य को बखूबी निभाती है।
‘‘कौन कहता है की आसमां में सुराख नहीं हो सकता , एक पत्थर तो तबीयत से उछालों यारों‘‘

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मेहमान आएँ तो क्या करें

मेहमान के आने से घर का माहौल अचानक बदल जाता है। एक नई हलचल सी होने लगती है जब घर के छोटे से लेकर बड़े सभी सदस्य उनकी मेहमाननवाज़ी में लग जाते हैं। यही मेहमान जब अतिथि के रूप में आते हैं तब तो सभी के चेहरे का रंग ही बदल जाता है। अतिथि-जिसका अर्थ है जिसके आने की कोई तिथि ना हो, जो बिना बताए अचानक आए। ऐसे में कुछ सामान्य तैयारियाँ करनी पड़ती हैं लेकिन इसका भी अलग मज़ा होता है।

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सोचना ही है तो अच्छा सोचिए

मोबाइल के स्क्रीन सेवर से भी बहुत कुछ सीखा जा सकता है। यह बात मैं इसलिए कह रही हूँ क्योंकि एक बार मैंने अपने मोबाइल को गौर से देखा जिस पर लिखा था- Think Fresh Deliver More इसका सीधा अर्थ होता है "ताजा सोंचे, ज्यादा दें" इस अर्थ की व्याख्या करने पर पता चलता है कि यह चार शब्दों का उद्धरण कितना जरूरी है। महज चार शब्दों में जैसे जीवन की कितनी बड़ी बात कह दी गई हो। हम जैसा सोचते हैं दुनिया हमें वैसी ही नजर आती है, आपने सुना तो होगा ही कि-
                     "जाकी रही भावना जैसी....प्रभु मूरत तिन देखी तैसी"
जी हाँ हम जैसा सोचते हैं हमें वही नज़र आता है। हम इस बात को ऐसे भी कह सकते हैं कि जब हम काला चश्मा लगाकर बाहर निकलते है तब हमें धूप होने के बावजूद छाया नजर आती है। अत: यह जरूरी है कि हम अच्छा सोंचे। Read more »

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नये व्यक्ति से बात कैसे शुरू करें।

"बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जाएगी" हम आप अक्सर ये सुनते कहते हैं कि हमारी यात्रा बहुत बोरिंग रही क्योंकि की आपने किसी से बात हीं नहीं कि। आप सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा चुप-चाप कर आए जबकि बहुत से लोग आपके ही कंपार्टमेंट में आपके साथ थे। आप कहीं साक्षात्कार के लिए गए आप को आता सब कुछ था परंतु आप कुछ भी नहीं बता सके। आपकी नौकरी लग जाती है, या आप पहले दिन कॉलेज जाते हैं। आपके सामने सभी लोग बाते करते है। हँसी मजाक करतें हैं पर आप किसी कोने में चुप-चाप अपना काम करते हैं। अगर आप में इस तरह की झिझक है तो क्या आप कभी भी बात नहीं करेंगे, करेंगे ना ? तो आप शर्माना छोड़िए, और बड़े विश्वास के साथ उस जगह अपनी हाज़िरी दर्ज कराइए । अगर आप में अभी भी वो विश्वास नहीं आ पाया है तो आप हमारी बात मानिए। Read more »

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यहाँ खरीदार बहुत हैं

दुनिया में हर वस्तु की कीमत होती है। यहां तक की मिट्टी भी फोकट में नहीं मिलती। पर बेचने वाले को अपना काम ही ठीक से करना न आता तो वस्तु बिकेगी कैसे? सब जानते हैं कि सफलता प्राप्त करने के लिए धन और मेहनत दोनों में से मेहनत की ज्यादा जरूरत होती है। बिना परिश्रम के कुछ भी नहीं मिल सकता। चोर को चोरी करने से पहले योजना बनानी पड़ती है। Read more »

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सफलता प्राप्ति के सहायक साथी

बहुत पुरानी कहावत है। विधार्थी जीवन साधनामय होता है। और सफलता प्राप्ति के

लिए सभी विधार्थियों को दी गई निम्न बातों पर अवश्य ही ध्यान देना चाहिए। Read more »

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हर व्यक्ति के लिए बनाया गया है काम

हम अक्सर यह कहते सुनते है कि कहाँ जाऊँ और क्या करुँ? मेरे लिए तो कोई काम ही नहीं है, या मुझे कुछ नहीं आता? आप सोच रहे होंगे कि बात तो सही है,परन्तु आप ने भी अपना काम चुनने से पहले यही दलील दी होगी। जो जीवन में कुछ अर्जित करना
चाहता है, जिसे अपने भविष्य की चिंता है, उसे करने को बहुत कुछमिल जाता है परन्तु जिसने कुछ न करने की कसम खा रखी है उसे चाहे अच्छे से अच्छे अवसर उपलब्ध हो वह सब में मीन मेख निकालने लगता है। ऐसे व्यक्ति जीवन में कुछ भी अर्जित नहीं कर पाते। Read more »

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