अस्वीकृति की अपनी भाषा होती है

 

कभी-कभी हम कई स्तरों पर अपने मित्रों, परिवार के सदस्यों, कार्यालय से घोर असहमत होते हैं..यह जरूरी नहीं है कि हर बात से सहमत हुआ जाए। आप स्वतंत्र दृष्टि रखने वाले व्यक्ति हो सकते हैं। सही मायने में व्यक्ति को स्वतंत्र होना ही चाहिए। अगर आप किसी के विचारों को बिना सोचे समझे स्वीकार कर लेते हैं तो यह आपकी स्वतंत्र दृष्टि का अपमान होगा। आप हमेशा किसी की बात को स्वीकार करने से पहले उसके अच्छे-बुरे परिणाम पर विचार करें। आप स्वयं पर विश्वास करें। अपनी दृष्टि से देखने की कोशिश करें।

भेड़ चाल के बारे में आपने जरूर सुना ही होगा। क्या आप इसका अर्थ जानते हैं ? इसका अर्थ होता है बिना दिमाग लगाए किसी के पीछे-पीछे चल देना। आप में और जानवर में यही भिन्नता होती है। पशु भी अपना दिमाग लगाकर जीता है, आप तो आखिर मनुष्य हैं। अगर आप किसी की बातों से असहमत हो जाते हैं तो यह आपकी बुराई नहीं है। बुराई तो तब होती है जब आप भेड़ चाल चलते हैं।

जब आप किसी की बातों से इत्तेफ़ाक नहीं रखते तभी आपको अपना विरोध दर्ज कर देना चाहिए परन्तु विरोध जताने और अस्वीकार करने की भी एक अपनी भाषा होता है। यह जरूरी नहीं है कि आप आक्रामक मुद्रा अपना कर ही किसी का विरोध करें। आप इत्मिनान से अपनी बातों को रखें। इस बात का खास ख्याल रखें कि आपकी आवाज ज्यादा ऊँची और आपके शब्द किसी को चुभ न जाए। अत: आप अस्वीकृति की भाषा का विकास करें ताकि आप किसी की बातों का सार गर्मीत विरोध दर्ज कर सकें और भेड़ चाल में शामिल होने के आदि ना हो सके।

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