एलर्जी : कारण और बचाव
आप ने एलर्जी के बारे में तो सुना ही होगा। अक्सर लोग इसके बारे में चर्चा करते रहते हैं। कोई कहता है कि मुझे बैंगन खाने से एलर्जी होती है, तो कोई कहता है कि वह जब भी किसी धूल भरे रास्ते से गुजरता है तो उसके चेहरे और शरीर के खुले भागों में खुजली होने लगती है।दरअसल, इस खुजली की बजह है कि आपका शरीर किसी पदार्थ से प्रतिक्रिया कर रहा होता है। शरीर द्वारा दिखायी गई, इसी प्रतिक्रिया को एलर्जी कहते हैं। यह रोग-प्रतिरोधी तन्त्र का एक व्याधि है जिसे “एटोपी” भी कहते हैं। “एलर्जी” शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग “वान पिरकेट” ने बाह्य पदार्थ की प्रतिक्रिया करने की शक्ति में हुए परिवर्तन के लिए किया था।
एलर्जी जो शुरूआत में बेहद मामूली लगता है और साधारणत: हम इसे नजरअंदाज कर देते हैं, कुछ मामलों में धीरे-धीरे यह गंभीर रूप धारण कर लेता है और तब हमें काफी परेशान कर देता है।
एलर्जी के प्रकार
मनुष्यों में होनेवाली “एलर्जी” को उसके द्वारा दिखाई गई “प्रतिक्रिया की तीव्रता” के आधार पर दो रूपों में विभाजित करते हैं। पहला “तत्काल प्रभाव दिखाने वाला” और दूसरा “विलंब से प्रभाव दिखाने वाला” एलर्जी।
पहले प्रकार की एलर्जी में जैसे ही आपका शरीर किसी वैसे पदार्थ के संपर्क में आता है, जिससे आपका शरीर प्रतिक्रिया करता है, तो कुछ क्षणों के बाद ही एलर्जी होने लगती है।
दूसरे प्रकार की एलर्जी में हमारे शरीर और प्रतिक्रिया जन्य पदार्थों के बीच देर से प्रतिक्रिया होती है। इस कारण से इसका शरीर पर तत्काल असर नहीं देखा जा सकता है। इस प्रकार की प्रतिक्रिया में कोशिकाओं को हानि पहुँच सकती है। “तपेदिक व छूत” से उत्पन्न होनेवाले रोगों के संपर्क में आने पर इस प्रकार की एलर्जी होती है।
कुछ व्यक्तियों में “जननिक कारणों” से भी एलर्जी हो जाती है। इस प्रकार की एलर्जी “ऐटोपी” कहलाती है। इसके कारण “परागज ज्वर” (Hay Fever) और “दमा” जैसे रोग होते हैं।
सभी एन्ज़ाइम एलर्जी उत्पन्न करने वाले होते हैं, क्योंकि ये प्रोटीन से युक्त होते हैं। इनसे एलर्जी तभी उत्पन्न होती है, जब ये सांस लेते समय धूल के रूप में शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। इस प्रकार के कणों को ही “एलर्जी उत्पन्न करने वाले कण/एलर्जन” कहते हैं।
अब सवाल उठता है कि मनुष्य में एलर्जी उत्पन्न होती किन कारकों से है ? हमारे शरीर में इसे उत्पन्न करने वाले कारक इस प्रकार हैं -----
● हवा में मौजूद विविध कारकों जैसे फूलों का पराग, मिट्टी, पालतू पशुओं की रूसी, धूल आदि के कारण किसी व्यक्ति को एलर्जी हो सकती है।
● किसी धातु, वनस्पतिक दूध व रसायन आदि को छूने से भी आपको एलर्जी हो सकती है, अगर आपका शरीर इसके प्रति संवेदनशीलता दिखाता है।
● खाने-पीने की कुछ चीजों जैसे – अंडे, मूंगफली, मेवा, दूध, सोया, गेहूं, शंख, मीन आदि से भी कभी-कभी एलर्जी उत्पन्न हो सकती है।
● बर्र, मधुमक्खी, ततैया, चींटी आदि के डंक से भी आपको एलर्जी हो सकती है।
एलर्जी से बचाव के उपाय ----
अगर आप यह सोचते हैं कि आपको एलर्जी नहीं हो सकती, क्योंकि अब तक इसने आपको अपना शिकार नहीं बनाया है तो आप गलत हैं। शायद ही कोई ऐसा इंसान हो जो अपने जीवन में कभी एलर्जी का शिकार नहीं बना हो। हम-आप चाह कर भी इसे नहीं रोक सकते। इससे मुक्ति नहीं मिल सकती, लेकिन इससे बचाव और इसका इलाज जरूर करा सकते हैं। ऐसा करके आप बेहतर महसूस करेगें।
एलर्जी की पहचान कैसे करें ----
● त्वचा पर दाने और फुंसियों का होना।
● गले में घरघराहट होना।
● सांस लेने में कठिनाई होना।
इसके अलावा कई अन्य प्रकार के लक्षण भी हैं, जो एलर्जी होने के कारणों पर निर्भर करते हैं। इनकी चर्चा हम इस प्रकार कर सकते हैं -----
● नाक में खुजली होना, नाक का बहना या इसका बंद हो जाना।
● साइनस पर दबाव आना।
● छींकना।
● आंखों में खुजली व जलन होना, लाली व सूजन होना, आंखओं से पानी बहना।
● गले में खुजली या खांसी होना।
● खाने का स्वाद समझने में परेशानी या गंध को नहीं समझ पाना।
● सिरदर्द।
● मन का बुरी तरह मचलना या मिजली होना और उलटी होना।
● पेट में दर्द होना या मरोड़ आना।
● दस्त लगना।
● मुंह के आसपास सूजन होना या भोजन के निबाले को निगलने में कठिनाई होना।
मरीज की देखभाल ----
इसका पता लगाने के लिए त्वचा या रक्त की जांच की जाती है। आपका डॉक्टर आपके शरीर को अच्छी तरह जांच कर व लक्षणों को पहचान कर उसके समुचित इलाज के लिए दवाइयां दे सकता है, जिसका सेवन कर अपने आप का बचाव कर सकते हैं।
अपने डॉक्टर को बुलाएं यदि -----
● आप एलर्जी की बजह से अपना सामान्य कार्य भी नहीं कर पा रहे हो।
● अगर आपको “101 डिग्री फारेनहाइट” या “38 डिग्री सेंटीग्रेड” से ज्यादा बुखार हो।
